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कुमारिख्मछ्पणीततं \

सीसांसाररोकवार्तिकस्‌

सुचरितमि्रम्रणीतया षाक्चिकाख्यया ्यापस्यन्ए समेतम्‌ 1

दलीयः संपुटः 1 सम्पादक भरीमासकरलम्‌ + मीमात्ताविद्ारद , वेदश्चिसेमणि वि. रामस्वापिक्ञाघ्ी, णम्‌ - ण, पौरस्त्यमन्थपरकाञ्चनका्योध्यक्ष 1 इद चं जनमन्दद्यमने राजदीवमुद्रण्यनायये प्तदध्य्ेण युद्रपित्वा अ्धशचिवम्‌ }

पोरर्वाभ्दा- १५१९. स्यादा १९७३.

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1 एकमन्ु्प उमम नन द्रत 11.3.14.

म्तथ सदस्राधिकरण्द्ादशरक्षण्या मौमाप्राया वदु्िशतिषहघं षर. घ्वामिङ्तं भाप्यप्‌ 1 तदुपरि प्रस्थानदयम्‌ -- मटर प्राभाक्रमिति 1 पक भ्यो पञ्च व्वाल्यानानि भाष्यस्य -- एका ददश, द्वितीया मध्यमदीका, दुतीथा दरी, चतुथी कारिका, पन्वमं तन्नवाक्िर उरवुदुच्तरिन्तद्म्‌ तेत्र दृह्मध्यम्ीके सम्प्रति नबर्तते\,

(7. 8.8 ए. प्र 188, 2 90.)

पण७1६८ पर दव ु०४वेादि 9 0 पर्‌ कत्‌ 1096 70०५, न्व एड पद्ा१५०७ ८४२३ १०८४९ दण 1.3 9704

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वर सनुवण्कावदव- 2 तयां ऽव८९,

गुषाच दणद्वण्यद, कतः 5 फफक व्गणपाश्यतम णप पी वषपेतपृषत्‌त पट इककव्छीवः ९, वहवाह फो प्र पलीपो- प्प तीष (प्फ) (, 1. 2), पपत प16 फला पा्पणेष्ट पाह न्काले कक तात्य) (त. 1. 6. 48 शा 1प्ण्वपलठ) १0 पल कदवा०-2वतकदवक- पदा जत कप्ठण्टुा 1४0 लता प्राणकऽद 5६19, {116 2.1.111 1111.3.3 111, तीप, 106 0ए३॥ तात गिशा०६॥ पराता शधोप्टञ एदल्मत्‌- पिष ८७ प्७ ह्वप एवपपुकतद-जो भथात्तो पर्मलिक्ञासा॥ प्लु पट एरव्टपकक £ पेठ पपटसीषटदछण करण #ष्वात शप्तौ ५६ ध6 चतरत ०६ ॥४8 करव्कृणिः परदित प्रर शप 0 व्वा८ एए पणा एषी पह कर्णं एद्यव 428, एष्व हद्व 18 प्पप्यिदिष्त्‌ त्नः नौ तनात् पणवशाज्मप्वृषहु प6 व्माद्लाछ पौर ए८वा8,

4८ कृकणा१्‌ 2 ककुद छा 1. 1, 1.) पण्ड 415 अकां व्ण.

16 कृलशपणु 08२ 1९ कवफतितमदुदयवयात लेके येष्यभषु श्रसिद्धापनि पदानि तानि सति सम्मये तदरथान्येय सूपरेप्विस्यवगन्तव्यस्‌ , नाध्या. हारादिभिरेषां परिरल्पनीयोऽथेः, परिमापितव्या वा पूवं चेदवाक्यान्येत्रैमि- श्रान्ते 1 द्रथा मेदयात्यानि व्याःर्येयानि, स्पपदाथौश्च व्याप्येया इति भयत्वभौरव प्रसन्येत #--1495 तछा ष्णात एपा6 10 06 निग्र १३ 86 05916 पव धल कणषपेऽ प्र कैल ऊकप्यड प्र८ १०७ 6 प्टकप्लष्े एड + छत्त्र वाुपनदुट उपवे पोप ॥रकालतीण्य ककत (ककण एणयपे5 पौः (पत्‌ प्य सर्फ), णि 1.1. रह पण्य 8 दव्छणस्य व्जाए० पछ) 15 10 08 पप्णततत्‌, 1९84 $ धकर्णमणत्‌ [र्पः इप्‌ २ष०्ष्द्‌ छण चट प्ण्पा्दयए६७प ८0 ददेय चठ पट्तक्छलप्‌ ल्माऽ पह इतत प्व प्राया टण्र९ प्ट व्छह्ुप्ठण्ड एतत्‌ पवस गधा वाल 81 १106 ऽप 15,

8. यत एपपेन्दद्०्व दपददकयम, १३८८, ०. 47.

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श्तािसत्‌ गुणामा्स्वफुता दधमाषतः 1 1( 1? एल 942.)

10८ पतरौ व्णातप्ह केष 16 + ९8 १7९ तेत्लद्नल्यं 0 1. 11... एशाह्णा [कसु द्व्ार6 हपु पुपु्ीदन्रमार, ~ ि९ ल्णाशदवलएते ।कषभाष

(सवश श्रमात्‌ सतिषा गुदुूध्वसःमवाति ( फिमूरः्वाव्‌ प्रमाणत्वं चौदुनायां धुते ( २,2 ८56 46 }

14८ किफवकीऽमुद

एत वणषु पष राल्) तत कपद्द कष्ण पथ वाणाणषह स्गण्णप्त दु षु एण्ुपपौठ§ 0० १०६ 7०5565 ॥टे धृष्णि ककण्लल एप्त प्या धषु कार दणयलमन्वा कदत दथा व08 7 क्प णण कपद्द? तष जणृष्ट पवत्य चत पलो पात प्ा्तवप्िढ दवञ्छ शणि कलया ृष्णवपद्रला, एष पीला प्ल छण एण्वण्व्छ्ये ५१ [ग्ण चणव्ल्व (प एत) 0 [णत पीला कराद्‌ 50 ध्णट्ुणध्रयेर्‌ कश्य चु 70 ुदण्छयय्य्‌ 9 परा एप ग्टह्य] कोव्टर कवन 1 1 त्थ प्त साठ उफन्हवघ्युः 0 ल्त००९९०६ ङ्‌ वेल्ल मा 1) कृ9ञ्णा, ८८१ णपद्मा6€8 रपत्‌ प्ल० इजप्रत 99 इदु ००८०१५०१ पद र्य गू08 (णद्ुणप्णिऽ ग्या प्य धार ४स्तष्टटाह 878 701 रणात्‌ छु शणो पणटुपयपना, पत चट धौल ४८व८ एटद्ठ द०यय[106९ दवति परपण प्ट, 8 परक चर णण णत वान्त [व्दष्८ कल्णदु कठिण 30 धापा 1000 "जाने फलानि यनिवि एए

5

दलम कलिकः शर गृण दुहत व्ष्व दणाण्ावऽ दणापादड कदम,

दलः पवा्षणटु कट ०९९ चट अपु धट त~ 1 7 मा क, एववोच्ा हए एवर्‌ फ€ सं परायकाएप्णाह ५४८ कण्णेण्टु णाह (भप्टव पठत्‌ (0), पिद्व्मवण्ट्ठ 0 16 वाष्टौ त्तया (02 प्लु धल 006 रवानि, पा्रपखणोनत एतत्ततो) एपपेञपपी्ाङपे, §1प पत्‌ 4 पप 03९0१47. = 18 १150 साम्य पट $-बृ्ततोप्पङ्वाय एव्र नृहवप्रला6 ष्णा जल प्ल्रलप्वत०ड पीड 0० रणात्‌ {16 [5 28 (णाप ४0 00, कतणल्‌,--4:व8त८7वतद 6८ 8 {1५४ एप्प, त्णाध्लाह कप, ४९ धरत्ला पल फष्लेकतणणञ साल्वे ४6 एङ पाल एषापरा, द्वप पषा प्टाफतहवप्ेणय एह दद ।च चठ ऋआध्क्ताप्लजुः ग्रता 6 कषप णिह पातर पोट कपपुत्द्रवो वान = दण्ट

पप ह्न्लनम्पनपपत्तच्ग्प अथातो धर्मजिरा्ा पूतरमाथाभेर एतम्‌ पमौख्यं विधये वच्च मामद्य; भयोननम्‌' 1, प. च्म १.४. 8, 7 छिव 4९ गृ ९०२०६ ९८१००९८ ष्टोढे शत्वादिमाष्यत्य यातः इत्येतल्‌ पद्वेऽलोकिशथौरष्ागदृत्िः भ्रयोजन्‌ 1

16 कवक {०१०१७०९6 (८ © (द ११ 49 फडः

केक इत्यादि प्यं चलन गौरवं प्रसस्पेत ' शष्येवमन्तं यपशष्ददूषगारथ मोजिदयालभापणपरमिति वार्धिमकिण स्याश्यातम्‌ तष मन्द अयोसनमिति मस्व टीकाकारः प्रयोजबं दरति -- रोड इर्यादि मष्यसये्यादिना खवेपूप्रस्थसरयपदगिषयं चेदमुच्यते, तेव वदुवयना- विपः 1 अङ्त्तद्ठिमातिपन्रताच्चायातदयप्दवोरेव अलौ$कयो शष्ानिगक्तिः प्रयोजनम्‌

पद कप्त 6 किवत (अन्ता एणतलध एकष १)

भ्ञत्र यपि रमते खोक इत्यादिमाप्वत्य प्रपांदुक्वा शररपी चापरो तयाप्ययशष्ददृभायमीविल्यदुमापयपरत्दमेव स्वौ- क्तम्‌ सदपि म्द मत्वा युः सतदश्षयथमाद मन्दता चोचिवानुदादमानपरलाद्रकयान्तरार्र््‌ = सपयद्मावरदोपपरष्दाद्‌ अंतःप्दष्य सीश्यंनानददैनाद्‌ 1 अत उक ~~ "मात स्मयेनभ्थिन ~> >^ + अदोननम्‌ + दष

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अ-वःवा्यमदैव यागादीनदुतिष्ठ^

चामिकवसमास्यान तघोगादिति गम्यते

पादनि हि धर्मस्य फटानीवि श्यवापिथवस्‌

चिद्रगोदोदमादनौ वा दु्छनि ष्टानिच॥

} दमाष्‌ तेष्वेव अरमतव धमौणीति द्तेनाद्‌। दिङ्नसरदयाविनिनुंको चर्मशम्दो निषएतैनम्‌ (1 9 रधर 192--194)

| षमाण्णण (06 पल दाक 16 004 10 पष्ठ 1 {06 १००९९ छा दाभव््मफान्णृा लत इव 0 1.

8 छापा 9) ९००९ 1996, 0 ॥१ इथ फर पणव तपण हणो 46 कणत पिणदए१०९, 91106 पका ४76 ००६ लाका ५६ प्त ०५१९३ 7111111 8.1... प्रषपय। 00140 ध]017५ ६१९५६८९३' ४8 भए ताप तवा ब, 41 परते छटा कनथः

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474, 1 पृण ¶< तण तात्प क्षा] वाष्मा04 1, (जातै्यण्त्त ०९ प्रलामाह कात्‌ 6७100] प्णालः 1711 9180 (१ 1०8), 9 {१४ (४८ णोन 800 पु\१८४ | 0०019111078 चापः कव ।00ण हटले प्वोदनाटषषणोऽ्पो

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हताय कथ्यमाने हिः सद्रखाघ्रप्यसौ मदेव्‌ 4 1-1-1- 9८०९8 111-113.

॥, किमा कदल (1111. 1 4 शकय काथ वृकुवनव

+ 9 कर व्ायल्सामा चल एद्धवतालपात तः हुयपथत्‌ यधा प्र) पणे सष्ठ 5 एपुणणतव्‌ 18 ददानत 8 पष पौण 18 एग 18 ददद विला 1.1; पदटुपण्यणाह 75 अफ्ििगीरवष्टिता भ्म , सिमतवार्‌ प्रा्ाहिघावद्‌-- एषा 0६ १८० णाह 5 तै दष चादर, गाुथष्पयड एषा 0८. एष एत्प्णप्ते ८८७ णण्रल्पे कष्ठ पादक व्णोदठणुजा कपट 095 पल्‌) छः 10६ इष्ट पह [11 7४४ एोलारपट पिः एणटदराट 18} प्रात 0४ दाका 488८४ पद जवै 6९64९८६8 16 पदा पपा पपपृ्ुट तठ ए०६ छण प्रपते तेलणद्ताह धाद पटाकाह पणत्‌ कणोत वपन पुप्णूा दषृण कलः चण प्रतत. वपव पर्ने पषण द्द हधातञ कण पु तमानय हल सात पव सरणा लषणः

14 -- वव सथर

1 गृपाठ पात्व्‌ 08 न्त्य निमित्तपरीषि 15 एषण छव क्त ण्ट काका शर्ककद्कत-- रण व्य दसपावाद0 वण6७ 0४ पप्य वश्दप, पण्ण्डीष धल कद्व [व्तषवरप्त {1.1 2) सदएष्ाशव पकाः पण्णा कष दाताठ 5 चवदवाठ, २५९१ पट ६408 = [9 पप एणाा्छ्रन) वैद्याछ्वे वणाव भो कावद एषु 11 1/1. पदाडृच्छण्ि पल्ल पील कल्यः इण ९8 ४६ पृणल्छपली कधा (दावव 18 पमो ग्ण अछा 0 ४६ कपर तात्य

णीः उदव (3 पपाद [1

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(ी सिमिचन्दु, विदनानोषम्मन्‌तवर्‌ > “8 एषा 01016 १46४

र्ण वत 24 2 रल 235 १२ 231

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न्व 00 पप्रिः ०६ त्त एाकाष दया ‰५ पलाध्त धाः इतताण्डदे कोपात दण कित पकष्णदणवककुद 9 प्ट प्णण्फृणणणत्‌ चर्मा दमोाणकप्प्‌ तत क्ाएणकाः ककककफणाध, पत 06 एतश्तभ कल दिदि0वह्छण्द्या पपवे आदत्त ताप्य पाष 9९ दुत १०६९८०8६ पह शष्कृशपणयाक्त ५९ एण्या पण्या द्तक्ोयापः 25 पण्य 0 कए वामप :--ययोततरं सुनीनां प्रामाण्यम्‌ = अष्णरपर, 3 ०0रलतीमा 5 एह इ, 8. 1 (4) : सद्वादित्वाच्च पाणिनेवैसनं प्रमाणम्‌ , धपद्रादिष्वात्र कालायनष्य शोक {प्पील्यल पापः ॥6 तति २८९]0४ 116 श०ाठ वपय,

86८०४ 9८70-8 कदम,

10 8र््णणव ध५--चोद्नार्षणोऽपा = धमेः--युपण्ञ (१६ प्रपात तधम पणन 18 10 06 रर्दुषत्‌ पणत पट काल भाद्र 0 11--परेसंस्पं सक्षणं च--0 )ए छदुि०३ इव पात काला एक पपोव्छतण, (3 वेल एवाव्धीठ- क्षा४ 08०९8 :--

प्वयमेकेन सूयेण शुत्ययोभ्यां निरूप्यते सर्पेऽपि हि तस्यो प्रमाणे कष्थचेऽ्यतः 0" (1, 1-2 ए९ा8० ‰,)

(णण०प्ण्ते = नोद्गाटक्षणः 13 छर00त 65 चोदृनेव छक्षणम्‌) शोदना खकश्षगमेव-- तव ८०दद्ाद ६८ उपानत्‌ छप वमद छापे पष प्ल एण्‌ प्पत्िणपक ना वतप 18 दण्वव्रण्ठ. एषठ, एप४8द्ु२; चोदना दि भूतं भवन्तं भविष्यन्तं मूष व्यवहिते विपरृष्ट॑शयेर्वयागीयकमथे पक्तोखचगसयिदं नान्परिर्नेन्दियम्‌ (यान्यद्‌ + कि मेन्दियम्‌ ) भभा पढ इयाधाल काते 0इ {णतप एलः भक्षत (कव्दक्दे) दयाल १७ एरदवषोणाञ (ष्ठण्णपट फण ०६ [ष [त्टकच्छत वते हणाचतठ, ह्र8 इद्त हप्रफप्रे९्‌ एलपला९ प्रणपे पटा ; ह्ण, 1 पट ९8 जपा एठपतनो ककत ठा तञ मः उगत धप्य९ कम्म फते 00 णठ वस्था सदाऽ

भत्यन्तासत्यदि श्वानसर्ये शृम्द्‌ः करोति हि ए! (&. ४.1, 1.2 ०८5९ 6.) छल वाठ [तवप्कद्न च0 0 1१९० धह पणार

जक ०६ ४व्णेदद. शार सया द्दु्पनहत वारण वाल्णाण किप्छ एल १६ प्ण 5 पर्छ 17८ भृषूद्नत 07 + पष्ट 7९

181

श्ण भवमशरयोयजव ए) पणक्धलः नुण्ान्छ-श्रयं ससद. अयोंपम्‌› प्रत्यक्षता, भण 1५ 9180 भणते 58 (2७, प्च (4 ५2 ९८३ (णठ क्र, 06 157 10 १0£ ०, स्सुिपण्ट्वे व्क, कर पिल वटुपस्त्‌ एण 0४६ ४६ कष्वायापणलाः [वुकोद्व्तवावे१ किव 0 कशा कणप 16 चपः (0 ४6 तनन्दय फैल तरित शा क्णो (ितयश्दिश्वत कथले चछ कवठ पत वदृ जथ तेष्णि्णाति, हप्त भौ तोर तककः कषन्त्प ठाः ण्णुष््ण

610१ कद वा1्८८

{५ 0णाध्ट्ते पण 10६ ९) नास्ण--ग्रदयक्ष साप्रमोगजम्‌ , भरयकषत्वात्‌-- 43 70 वो का१९, [ [व$०5 पदमा 98 पर एष 5पणृल्परठ धल 6 कुना गलः कृतफषह ठपपण 0९ 7४141005 ५१०९९ ४९१ 4 ०{ १०३९९५७ प€ {9०405 त्यक्त्व 11.111 117. 11111... 4० ०९०९१1९ कणत 09700095 9 कर्द णुष्यकम धट 88६ पपत [प्र्णाज छण्र्गऽ--भतीवानागव्र- परल एष्टा ४8 {0४0 ०६ 018 8 पण्णा योतरिग्रलक्च सत्सश््रपोगयम्‌ भत्यक्षतवाद्‌, मस्मध्त्यकवत्‌ १० ' णम जाक) एशण्छकयल १12 ०0 करट एण्वगरल्छये पलार 1 त्ण्रट6 1)12 वयाश्ण नहः का) ०िल्तम र्थणट ए8, ६16 प्ट 88 वदाष्वदुवदव

" मस्मद्र्दा मिदव पोग्वयंममिभीपते भवीष्ठानातेश्यये सूर्म स्यददितेऽपि र" 14 ष्लण्छओ)

परसक्ष यौनिनानिट कैनि्मु्छप्मनामपि 1 वि्मानोपडम्मत्वमसिदध सशर वान्‌ सति भविष्यच्ल्य वा हेतोप्तदूप्राद्धष्यनिचारिचा भूपति तेनाह छोकतिद सदित्ययम्‌ धोकन्यतिरिैः दि धत्य योधिनःयत्पे शस्यक्षत्वेन ठस्यापि विष्ठमरानोपडग्मगम्‌ सस्पंभयोगजश्व वाप्यस्य द्त्यक्षवद्‌ >वेत्‌ धद , चटः६९8 46.29) कल्मातय प्छ वाश्व चाव्ययः द्मैछर धर ६००६ धथ 5 ०५ दव्य [्ररडधणह भगस, 4७ 4/1... शप्त १४६ 80 [एप 4941 व्भलते कक्ुष्रव |. दतशोव सयत धव दुव्दणसनककष्य 1४३१ 198 छप 9 (४ वपर कज्ज 3)

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प्तस्मषद्‌ स्वामादिऱ तेषामप्रमाणरवमिष्यताम्‌॥ प्रामाण्यं परापिश्षमच्र र्यायोऽभिधीयते सप्रामाण्यमव्तुत्वात स्यात्‌ कारणदोवत : यस्तुव्वु गुकैसतेषं प्रामाण्यसुपजन्यते ॥' (त. 1, 2, १६६55 58 & 39.)

रमाताल 38 पत्ल्गृ्छते ४8 पीठ पथपात्रा वव्थ्ान्ठ छह गा ८०६" फाप्ठणड चठ एतातुवित पतत, फ0 © वृल्छयणः पटे एणाकीक्ण कृष्व्माप-00दपप०ाह प्राणना ६१८ तृण्प्ध्‌ल्डड पर्ष? 1, णप ध््< 0प्ालः परदत्‌, एणा 15 ज्कपण्व्‌ 6 पठ एण्डपा६ फलय तव क्णदुाप्तनाऽ "प्रत 85 ००, चल कला$ण्ण पर परोऽ इशः४९-उपुष्ठ, चल सव्वृपोरलत्‌ पृप्पपप्तलड फल शाह प्रण पात्‌ "ट लवहल्छ कटाप्-व्ठद्पतिगात $ अरपत्‌ 50 तलु 08 पद्लेपत्व्‌ पष्प, 6, वरटह्लिऽ एर कणृष्य, पट

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वद्धभेपदपाष्या्गिस्पणविवधया 1.1. 2 ७46 193)

अहवा 1१ रत्यु एप्त पोर एप्त कृष्कप्रऽ 01658 णा प्प (ुपरीतिः), पत्‌ 1015 १० 06 पवत्य 0 प्र कणः पणित 0 पीठ पतेद्‌ शववतप०९९ फते 3] वेल १८८८8८९७ वय @0 वते दित) दव €णुमणव्त्‌ ¢ दण्वेदतव, [६1 (1९ एतपठिप्श्षत€ च९5८ एतदा २०८॥19च्टह, 0नक्ाऽह ताण) व्च वप्ो9३, कप्त हः ४९ किलः धात प्त पाण पवात्‌. 6 (सप तोत ॥ललृठाट [पय] चकग कण्‌ ०७ उत्त प्८९३ पणव धा< व्वमप्ोणित्‌ वत्ललरू०्ं९ञ धलाटाछ शापे प्जडट्वपसा करक्रापव, छकान्‌) 35 एण्पन्ट्‌ पठ [ष्णि 0८० ६१९७८ हछपिप्टड पठ कृपण पत्ते कत्‌ लादेपलड [पा ध्रा 3 1 कृषतः ८2 दृण छट पप्र पथप्णा, वद्मा धट १व्यछ स्तत वप्त 1116 उष्मा ८६८5 ५८ $८वा६ 70589 *पेन पष्ठमयजन्ते देवाः सानि पमि प्रपमास्पापसतु+ प्र

, निदष्यस्व षौ चे तदसदनिकस्यना \ वमप सधारणयेन चन्मूषटादेन धापययम्‌ } शाहदरा धते शनप्यटरवा एत (4, ¢ 14.16.)

6 वण्याण भवदाव चृता एत {णज

"पोग़रचाप 9 शानमानमरयशलयं पारार्थ्ये सयन्त अप्यमिदरतु हेवा भवादुकभदानानु्पते, त्ानप्पाप्यमावमिष्यत्वि तथ द्रफोररि चादिनाष्ठादव्‌ याधार्यदप्यन्य पारणम्‌ , भयेनियुत्पधीन्याव्‌ क्ाननिवृे ) भतो द्रोप साधारणो ष्ार्थापरार इति शूव निराश्िये 1 श्रि उन्मूखो शरानपद्लद + षतस्तरिमश्चिते निराङठ एवेति णष्नाधेददनाये पूवो ररपिमन भाष्या

अवल! #८ (1.5 9 7० 99, © 36)

एम धल शवददद वै दवेडयठ (व्यव वरट्‌) णकाक ५६ 196 0व6#0 त्जपद्वफ् पो्िदकक्ाफढ का पार १९४०१ दण }6 पठत 1० प्प पट १२८७ (८६ वुल चण्‌ (4/1 111 1.1.131. 31. 18 दञाहय्राह तट दा 0६ (ट नुच बरुवा पिणक ८० हुणणस) फणि 1६ कलु १९ कजाााशराष्पे 1/1... .1 ०६ भट ०ुष्छाह कृष [त्टन्शा = वाह ९९(०॥ पट फदल्‌ 2 [5 ए9 करल कर्लदतत 10 इणुणाव्ठत ॥६ वाप पपी अ, 1 शहर 60 धट प्टप्केश्वष्वेकृद फालो वतप व्व्याफ [0९ पण्ड्णयाछाऽ ऋणीठणा ग्ट पोषण प्ाप्ठञुन्पुपाहट एथुद्यड पल वर्वतोधात्ह दु चतु 0 चट रवत 99९ एल प्पालपृाल्व भो व्यफ्णणाह0ित 9004९ 1४ {06 हा९ 1196 06 = व्छद्णदण्वह तट कणक्यः त्वात] -षादरयद्यन्य-- 890 2०६9 पठ एलाह्ट पवद 100 क्णषुणाप्रभार पए6 पलन्छृरपय एकत्‌ प्य चः पह दद्वोपकाशार णृ 09 9 शाह 9 1 एकदत कठ्‌ स्रयद्ालाा) (ललव भल्ल) 1६ प्म} ४6 कृपपील्व कण ४6 स्लतीछा [६ 8)88८ व्लााणध पठ पकक्ादष्छल स्कल कव्व व्दपलह ६९ प्तदक्व 22 ०६९ १0 परार66 [11 केल्या अदावेव १0 पल्ल भत रण 9८ णले प्म 0 गलप जुष्टा 15 सवने

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यै कोऽ्ैः{ यो निःश्रेयसाय श्योतिष्टोमादि रोऽनथै, ? य. भ्रप्यवायाध श्येनो , धेः ुरिपयेवमादि. तध्ानर्णो धै गो मा भृदितययंगरदणप्र-- छकपणड धाह श्प तत पणात्‌ ककु 30 तठ ककद- वपन्त, 1६18 कपलिकृष्छल्त्‌ ४३ पो ऋतो) 18 दकफणर एण्पप्लेपहु न्प्ल फोऽऽ पररह ऽण्यव ध्वे ददलृपवे८ः ! प्रिमप प9 8८०९ ०६ वप्यण भा कादा ववृक जं एाण्तेप्ट शणः ऋत्‌ शप्र षटु5 पप द6 एलएणप०, 89 पणय उममम्‌ 1१ प6 एवेक्ठम एलका पता फलो रणुनेप्टते धाते पा सित 18 णप्राल्व-- विषेगनिपेष्यौ--पतप भए व्यार कव ६४ वावाठ पण्नृष्लीरणुक, गप ईुलाठ वद्वा 0९तप३€ प्र 2 धणुतण6त {ण तकरीपह्वे पो ण्ट.) इकप्ण्ठकाद कव्‌ एषपा०उ 0 छाव ज्यु पाणण 18 प्रपत ४) किक पा छापरत्सते फ़ पह 014694 :-- "यं पुभरसावनर्थः 7 हिसा हि सा, हिसा परततिविद्धा'। कप्ण्ला अपोकणुरनप्रैणा पण छहह० 18 दष्टा 118 7 कव. 7116 पणत वमपम्‌ 18 1ए}:80 11 ८8 ६९५७९ 4.4. प्रपत ऽवीद्ढाव, पठ लक्मा एवल पट ०० लफट लुलव 7 ध८ एकाण्द8. वरर छप ४6 ०६5८९06 न्वते ८७8 1 9६ प्ण तपतेऽ दाद भत्‌ काकाक्त ; पथः वणुरहव्दााौड इण्वाुध प्राते एकाहः वट पोपदड, भोपत णठ णौ [ठीणणोएते, प्रा प° ४९९०त 06०एद्ु8 0 1106 ८१०० ऽऽ [6 5490

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17

लमा 16 कद्पाठ का पकुकन्वरए८ ; सरस्रपोमै शुर्यश्येन्दियाणो शदिजन्म 0704000 = वणल 2168 पण्णा क022.1160 15 त्फलं 0 0 हला 0ादटष्ञ फ) {76 णुद एधरशघ्त-ात पण सफर प्ट 7700095, 2.१ सप्सम्पयोगगर्व 0 605 पाथ [ववषव सङुकटशवपकाकाकव-- ग्रहं वि्रसानोपम्भतम्‌ सरभ्प्योग्जव्वात्‌, 146 ४88१५ 9587८: श्रलक्षमनि- मिं, पुवंशक्षणरे टि, तस्‌" 18 (0 18 1[पारकृतएल्ते चाप्ड : (टं 06 णपाल कृष्णम्‌ पोल हततत १०९९ प०द हार्ट धह वरलीप्कौठप ०६ 770(दुवकठ एषणा कण] पा< १८८५ (क ण्वा३) ति धृ स्रवहपदणः णा 8 पिचमानोपणस्मनत्व. 111९ 274८149 एण8 प्रोणऽः ,

श्यकं यञजने सिं ठध्यैवंधमैकस्वतः

दिचमानोपछम्भर्ये तेन ध्मेऽनिमित्ता

एर्वलक्षगकत्वे स्वरूपपिवक्षया

पएवंरिङ्नरूमिस्येतद्‌ माप्य कारेण प्यते

यततोऽफित तत्र धर्मोऽयं बियमानोपरम्मनम्‌

वेत्मात्‌ तेनं प्रसिद्धेन गभ्यतामनिमित्ता )

अतयक्षत्वमदरो हैलुः शेषं इेतुपिदये ।'

(1. 4. 4. एधः 18-21}

छलि कलकृदवपणषठ द( चल इवाव ददद्व,

$णपण (क ८व7द5 ४९ ८२६5१ 4९४९ गृण 176 5017 णौ0 4170. (1) सष्सेपरयोगे पुरुपस्येन्दियाणां बुद्धिजन्म ततमत्यक्षम्‌ ; (2) अनिमिषं विचमगमोपम्मनव्याद्‌ 70० फर: वय कष्टा यो९ वीण किक च्यत प6 शल्ण्ठवे मद दलोकणड प्व कव्व ३९ यन प्रानः प्रधाव बा दुधालयव्टा सद्धा कच [ढस्य टु कुष्ट चेषं भस पेप्रपणु पल धका व्णुमदम, प्ण ल्षएावव्ण्य ४४८ एतत कव्ठृत्तव्‌ छक पारे एवा पपा्न्ण ल्ल्य (6० एर्व ४< वल पृष्ट ल्थोल्प्‌ वदकल धाः हिद शद 5 भग 2016 पाठ हलूधयददैः पुवः, द्णप्टण्ल, दए वेद्य 0 हाुवईद प्रणप्राति ४८ ०० ग्ण] पलल णय कपय च९०९४७१द१८ ४6 ई्रदयेद्लर ९८ इह वट वेदीकिजत वकण दत्‌ नोल कतदाण्दतर अण्ण फणा दप कवुपषव

" 19 (दकः ५9८ 9] एद पथः हदा द्ददः पण णण णण कप्त, 5० (९ वाप्ुद्धत० 1०1९७ २९ पणफल्‌ कृण पक इरि १७ जपृकणदु 07043 स्तम्धयोमजष्व `